Friday, May 2, 2014

सफाई व्यवस्था पर जरूरी है जागरूकता

पीलिया फैलने के बाद रायपुर में धरना दिया गया। संगवारी मित्र भाई गिरीश मिश्रा ने अपील भी की थी लोगों से धरने में शामिल होने की थी। पीलिया की वजह दूषित जल है। यह भी ठीक है कि निगम का ध्यान आकर्षित करने के लिए धरना ज़रूरी है। पर नगर निगम में जनता के प्रतिनिधि अधिकारियों के सर ठीकरा फोड़ते हैं और अधिकारी सफाई कंपनी पर जुर्माना ठोंकने के अतिरिक्त और कुछ नहीं कर पाते। सफाई कर्मियों का आलम यह है कि वे सफाई करते कम और सुस्ताते ज्यादा दिखाई देते हैं। एक महत्वपूर्ण बात पर मैं भी सबका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। वह यह कि सफाई कर्मचारियों के बारे में कल रात एक सज्जन ने कहा पहला तो एक तो वे कभी-कभार दिखाई दे जाते हैं पर सफाई करते हुए नहीं बल्कि किसी पेड़ की छांव में आराम फरमाते या किसी चाय की दुकान पर चाय पीते या नाश्ता करते हुए। उनका कहना था लोग उन्हें अतिरिक्त पैसे भी दे देते हैं ताकि वे उनके घरों के आसपास सफाई कर दें। उनकी शिकायत थी कि पैसे देने के बाद भी वे सफाई किए बिना भाग खड़े होते हैं। यह हुई एक बात। दूसरे शहर में यहां वहां कचरा फेंकते लोग दिखाई दे जाते हैं। यहां तक कि कोई देखे नहीं इसके लिए लोग रात ग्यारह-बारह बजे के बाद जहां कहीं खुला मैदान या कचरा डालने लायक जगह दिखती है कचरा डालने से नहीं चूकते। यदि जगह आसपास नहीं हुई तो बाकायदा दुपहिया वाहनों में कचरे के पैकेट रख कर ऐसी जगहों पर डालने जाते मैंने लोगों को देखा है। आरडब्लूएमपीएल की ओर से कचरा डालने के लिए घर-घर डस्ट बिन दिया गया है। बावजूद इसके लोग ऐसा करते हैं। पूछने पर पता चला कि कचरा उठाने के लिए सफाई कर्मचारी कई-कई दिन तक नहीं आते हैं। यह भी एक सच है। मेरी गली मेरी पहल के कारण सड़क तो साफ-सुथरी रहती है, लेकिन नाली की सफाई हुए दो महीनों से ज्यादा हो गए हैं। पूरी नाली भर गई है। ऐसे में मेरी गुजारिश है कि संगवारी समूह के लोग यदि लोगों को जागरूक करने के लिए समय निकालें और सफाई कंपनी के कर्मचारियों को सफाई करने के लिए प्रेरित करें तो सफाई की समस्या के निराकरण की दिशा में एक ठोस पहल होगी और बीमारियों से भी बचाव होगा। मैं इसके लिए समय देने को तैयार हूं। कहिए क्या कहते हैं आप ?