जोबी हथेलियों में हौसले की लकीरें...
आलराउंडर जोबी मोटीवेशनल स्पीकर भी हैं
जन्म से ही शरीर से बाधित किसी इंसान की
उड़ान क्या हो सकती है इसकी क्या कल्पना आप कर सकते हैं ?
आइए जानें उस शख्स के बारे में जो जन्म से
विकलांग होने के बावजूद पंजा कुश्ती में जापान, स्पेन, इजिप्त, इज़रायल जैसे देशों
में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके जोबी मैथ्यू के बारे में...
प्रदेश में आयोजित 40वीं राष्ट्रीय पंजा
कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने आए जोबी ने कांस्य पदक हासिल किया। उन्हें देख कर
सहसा यकीन ही नहीं होता कि वह न केवल पंजा कुश्ती के खिलाड़ी हैं वरन् बैडमिंटन,
गोला फेंक, तैराकी, व्हीलचेयर टेबल टेनिस जैसे खेलों में भी महारत रखते हैं।
जोबी ने अब तक जापान में 2005 में विश्व पंजा
कुश्ती चैम्पियनशिप में एक स्वर्ण पदक, दो कांस्य पदक जीते, 2008 में स्पेन में
सामान्य तथा फिजीकली चैलेंज्ड वर्ग में एक स्वर्ण और एक रजत पदक, 2009 में इजिप्त
में दो रजत पदक, 2012 में तेलअवीव में 12 पदक हासिल किए थे इनमें 2 स्वर्ण, 6 रजत
तथा 4 कांस्य पदक 2012 में ही स्पेन में सामान्य वर्ग में रजत पदक और विकलांग वर्ग
में स्वर्ण पदक, साल 2014 में पंजा कुश्ती विश्व चैम्पियनशिप में 2 रजत पदक हासिल
किए। इसके अलावा 2013 में अमेरिका में पैरालिम्पक खेलों में शामिल हो चुके हैं
जोबी। 2014 में पोलैण्ड में संपन्न पहली पंजा कु्श्ती विश्व प्रतियोगिता में दो
रजत पदक भी हासिल किए हैं उन्होंने।
है न कमाल का खिलाड़ी जिसके हौसले ने शरीर की
तमाम बाधाओं को हराकर दुनिया भर में अपना और देश का नाम रौशन किया है।
अब जानें 1976 में केरल के अडुक्कम गांव में
जन्मे इस अद्भुत खिलाड़ी की इस ऊंची उड़ान की शुरुआत के बारे में और कैसे हासिल
किया यह मुकाम...
जोबी ने बताया कि अपने गांव वही एक इकलौते
विकलांग थे। केरल के गांव में ही प्रायमरी और हाईस्कूल तक की पढ़ाई की। उनका स्कूल
गांव से 12 किलोमीटर दूर था और वे यह दूरी पैदल ही नापते थे। स्कूली दिनों को याद
करते हुए वे बताते हैं कि उनकी स्कूल का फुटबाल के खेल में पूरे इलाके में नाम था।
जब दूसरे साथी फुटबाल खेल रहे होते तब वे मैदान के बाहर से उन्हें चीयर किया करते
थे।
पंजा कुश्ती की शुरुआत के बारे में जोबी कहते
हैं कि जब भी उनकी स्कूल की टीम कोई मैच जीत कर आती तो वे उन्हें पंजा लड़ाने की
चुनौती देते। कोई भी खिलाड़ी उन्हें इस खेल में हरा नहीं पाता था। यही शौक आगे चल
कर उनका खेल बन गया। वे बताते हैं स्कूली दिनों में उन्हें पंजा कुश्ती के खेल के
बारे में मालूम नहीं था। उन्हें इसके बारे में 10वीं के बाद पता चला। एक मजेदार
वाकया याद करते हुए जोबी ने बताया कि जब वह एक जिम में गए तब जिम के प्रशिक्षक ने
उन्हें वहां से यह कह कर वापस कर दिया कि तुम कुछ नहीं कर पाओगे। लेकिन पंजा कुश्ती
व अन्य खेलों में लगाव के कारण आज वे इस मुकाम तक आ पहुंचे हैं।
अपने भारतीय होने पर गर्व करने वाले जोबी ने
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि मोदी ने मन
की बात में कहा था- खिलाड़़ी देश की संपत्ति । भारत में 63 प्रतिशत युवा हैं और इस
कारण हम खेलों में विदेशों में जीत सकते हैं। जोबी ने नरेन्द्र मोदी के इन शब्दों
पर पूरा विश्वास जताया।
हंसी हंसी में जोबी ने बताया कि लोगों का जन्म
प्रमाण पत्र सबसे पहले बनता है लेकिन उनका सबसे पहला प्रमाण पत्र विकलांगता का बना
था और आज वे सामान्य विकलांग के रूप में ही नहीं सामान्य वर्ग में वे विश्व
चैम्पियन बने। पंजा कुश्ती में सामान्य और विकलांग वर्ग को स्पष्ट करते हुए बताया
कि दाएं हाथ से विकलांग वर्ग में और बाएं हाथ से सामान्य वर्ग में खेला जाता है।
अमेरिका के मिशीगन में डॉर्फ (1.40 सेमी से
कम ऊंचाई) ओलिंम्पिक में भाग लिया था जिसमें दुनिया और भारत में पहली बार 5 गोल्ड
मेडल जीते थे। जोबी ने यहां डिस्कस थ्रो व शाटपुट में 3 तथा बैडमिंटन सिंगल व
डबल्स 2 गोल्ड मैडल जीते। यह पहला और एकमात्र अवसर है जब पांच मैडल्स डॉर्फ
ओलिम्लिक में भारत ने हासिल किए। पंजा कुश्ती डॉर्फ ओलिम्पिक में अभी शामिल नहीं
हुआ है।
जोबी ने बताया कि पहली विकलांग पंजा कुश्ती
की पोलैंड में संपन्न विश्व चैम्पियनशिप में 2 रजत पदक उन्होंने हासिल किया।
अब जानते हैं उनके जीवन के दूसरे पहलुओं के
बारे में। जोबी विवाहित हैं। जोबी विवाहित हैं। उनकी पत्नी डॉ. मेघा एस. पिल्लई
क्लासिकल डांसर हैं जो कि हिंदू हैं जबकि जोबी इसाई। उनके दो पुत्र है- 7 वर्ष के
ज्योदिस तथा 9 महीने के विद्युत। जोबी भारत पेट्रोलियम में कोच्चि में सहायक
प्रबंधक हैं साथ ही वे एक मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। जोबी बताते हैं कि उन्होंने
अनेक संस्थानों के साथ कार्पोरेट कंपनियों में मोटीवेशनल स्पीच किये हैं।

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